Rajesh Khanna

सुपर स्टार राहू

जन्म कुंडली में राहू को छाया ग्रह माना जाता है | कुछ ज्योतिषी राहू और केतु की दृष्टि को भी नकारते हैं यह कहते हुए कि ये दोनों छाया ग्रह हैं | अष्टकवर्ग में तो इन दोनों ग्रहों को सम्मिलित ही नहीं किया गया | आज के इस आर्टिकल में मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि राहू की ज्योतिष में क्या भूमिका है |

राहू वास्तव में एक ऐसा ग्रह है जिसे समझने के लिए किताबें पढना काफी नहीं होगा | लोगों की जिन्दगी में झाँक कर देखना होगा कि इस ग्रह की क्या भूमिका रही | फिर एक दो कुंडली से कुछ नहीं होगा | इस दिशा में जितना शोध किया जाए कम होगा |

भारत को पहला सुपर स्टार राहू ने दिया

एक ऐसे व्यक्ति की कुंडली प्रस्तुत है जिसके जीवन को राहू ने सार्थक बनाया | राजेश खन्ना जिन्हें बालीवुड में काका या बाबू मोशाय भी कहा जाता है | हिंदी फिल्मों के पहले सुपरस्टार के नाम से मशहूर राजेश खन्ना को बचपन से ही फिल्मों में रूचि थी | आइये समझते हैं फिल्मों में इनके रुझान को इनकी कुंडली के माध्यम से |

Rajesh Khanna Horoscope - Kundali

राजेश खन्ना की कुंडली में बुध गुरु का राशि परिवर्तन उनको अभिनय की क्षमता दे रहा है | पांचवां घर मनोरंजन का कारक है | पांचवें घर का स्वामी सातवें घर में है और लग्नेश साथ है | बुध शुक्र का सातवें घर में योग उन्हें अभिनय की और ले गया | शुक्र कला देता है और बुध उसमे थोड़ी शरारत भर देता है | गुरु की द्रृष्टि गंभीरता और सूर्य उनके व्यक्तित्व की अमित छाप है |

तीन शुभ ग्रह केंद्र में एक बड़े व्यक्तित्व और प्रतिभा का संकेत दे रहे हैं |

कुल मिलाकर बुध गुरु शुक्र और सूर्य राजेश खन्ना को अभिनय के क्षेत्र में ले गए परन्तु इनमे से कोई भी ग्रह उतना प्रभावशाली नहीं था जितना राहू है |

राजेश खन्ना का जन्म सूर्य की दशा में हुआ था | चन्द्र के बाद मंगल की दशा में भी

1965 यूनाइटेड प्रोड्यूसर्सने राजेश खन्ना को दस हजार लोगों में से चुना था | दस हजार में से आठ लोगों में राजेश खन्ना का नाम था और अंत में इन्हें विजय मिली | यहीं से राहू की महादशा की शुरुआत हुई थी |

राहू की दशा शुरू होते ही फिल्मों में राजेश खन्ना सक्रीय हो गए थे | 1966 में इनकी पहली फिल्म आई | लग्न में बैठा गुरु उनके लिए वरदान साबित हुआ जब गुरु की दशा में 1969 में आराधना फिल्म आई | इस फिल्म ने उन्हें इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया | यहीं से सुपर स्टार की शुरुआत हुई |

Rahu Mahadasha

1970 से 1975 तक राजेश खन्ना न केवल एक सुपर स्टार थे बल्कि लोग उन्हें भगवान् मानने लगे थे | इतना यश उन्हें मिला तो उसका कारण राहू ही था इस बात को और भी अधिक गहराई से परखने के लिए कुंडली का द्रेष्कोंन चक्र देखते हैं

 

Rajesh Khanna Dreshkon Chakra

अधिकतर लोग द्रेश्कोंन चक्र को नजरअंदाज कर देते हैं जबकि व्यक्ति को जीवन में कौन सा ग्रह आगे ले जाएगा इसी कुंडली से पता चलता है | हरे निशान इस बात के सूचक हैं कि राहू सारे शुभ ग्रहों से युक्त दृष्ट होकर लाभ स्थान में है | ऐसा राहू कुंडली के जिस घर को देखता है अपनी दृष्टि से उस घर के फल को कई गुना बढ़ा देता है | पहली दृष्टि तीसरे स्थान पर है जो पराक्रम स्थान कहलाता है | काका के पराक्रम के आगे उस समय कोई नहीं टिक पाया था यह सर्वविदित है |

दूसरी दृष्टि पंचम भाव पर है जो प्रेम सम्बन्ध, हुनर, विद्द्या और ज्ञान का है | राजेश खन्ना की प्रतिभा किस से छुपी है | रही प्रेम सम्बन्ध की बात तो राजेश खन्ना को प्यार करने वालों की कमी नहीं थी | लड़कियां इनकी दीवानी थी यह सब जानते हैं |

तीसरी दृष्टि राहू की पड़ती है सप्तम भाव पर जो कि पत्नी का है | वैबाहिक जीवन तब तक चला जब तक राहू की दशा थी | इस तरह राहू ने प्रमाणित किया कि राहू की दृष्टि ने उनका कल्याण ही किया है | उनके वैवाहिक जीवन में मतभेद और असफलता के कई अन्य कारण थे | मिथुन लग्न का मारकेश सूर्य, वक्री सप्तमेश, अस्त शुक्र (द्वादशेश जो कि पृथकताजनक ग्रह होता है) उनके आपसी संबंधों में मतभेद के कारण बने |

राहू के नाम से भी लोग भयभीत हो जाते हैं तो इसे राहू की असाधारण क्षमता ही कहा जा सकता है | सरस्वती की कृपा उन लोगों पर होती है जिनका राहू अच्छा होता है | ज्ञान के मामले में ऐसे लोग निर्विवाद रूप से अग्रणी रहते हैं | गुपचुप रोमांस, चुगली, धोखा, जासूसी, षड्यंत्र आदि पर राहू का एकाधिकार रहता है | राहू की कृपा है तो आपका वार अचूक होगा और आपसे उलझने वाला व्यक्ति स्वयं फंस जाएगा | कलयुग में जिस ग्रह का बोलबाला है वह राहू ही है |